नीरज और बबली—दो नाम, जो क्लास 12th की गलियों में अलग ही जादू बिखेरते थे। स्कूल में सबको लगता था कि दोनों बस अच्छे दोस्त हैं, लेकिन उनके दिल में जो था, उसे शायद सिर्फ वही जानते थे। नीरज मस्तीखोर, हंसमुख और थोड़ा शरारती लड़का था, जिसे पढ़ाई से ज्यादा दोस्तों के साथ मस्ती करना पसंद था। वहीं, बबली क्लास की टॉपर थी—शांत, सुसंस्कारी और सादगी में लिपटी हुई। हर सुबह प्रार्थना के समय नीरज जानबूझकर बबली की पंक्ति के पास खड़ा हो जाता। जब भी प्रिंसिपल की नज़र पड़ती, नीरज फटाफट प्रार्थना करने लगता, और बबली दबे होंठों से मुस्कुरा देती।

लाइब्रेरी में पढ़ाई के बहाने, नीरज अक्सर बबली की टेबल पर बैठ जाता। “मैथ्स का ये सवाल मुझे नहीं आ रहा, समझा दो ना,” नीरज कहता। बबली हल्की सी आंखें घुमाकर कहती, “तुम्हें पढ़ाई में कभी मन लगेगा?” “मन तो लगता है… लेकिन तुम्हारे पास बैठकर,” नीरज मुस्कुराता, और बबली किताब में आंखें गड़ा लेती। एक दिन, अचानक मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। लाइब्रेरी की खिड़की के पास खड़ी बबली बाहर गिरती बूंदों को देख रही थी। “क्या सोच रही हो?” नीरज ने धीरे से पूछा। “बस… ये बारिश कितनी यादें बना रही है,” बबली ने धीमे से कहा। नीरज ने उसकी आंखों में देखते हुए कहा, “और ये बारिश… हमारे बीच का फासला भी कम कर रही है।”उस दिन दोनों चुप थे, लेकिन दिल की धड़कनों ने बहुत कुछ कह दिया था। बोर्ड प्रैक्टिकल्स चल रहे थे। एक दिन बबली बहुत चुप थी। नीरज ने पूछा, “क्या हुआ?” “पापा कह रहे हैं कि 12th के बाद मुझे दिल्ली भेज देंगे आगे की पढ़ाई के लिए,” उसकी आवाज़ में हल्की कंपकंपी थी।
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नीरज का चेहरा उतर गया, “मतलब… हम?” बबली ने आंखें झुका लीं, “पता नहीं…” उस रात नीरज सो नहीं पाया। उसे डर था कि कहीं ये रिश्ता सिर्फ स्कूल की दीवारों में ही कैद न रह जाए। अगले दिन, स्कूल के गेट पर नीरज ने बबली को रोका। “आज एक बात कहनी है… और अगर ना भी कह पाऊं, तो जिंदगीभर पछताऊंगा।” बबली चुप रही। “तुम्हारी हंसी… मेरी सबसे प्यारी आदत बन गई है। बबली… मैं तुमसे प्यार करता हूं।”बबली की आंखों में आंसू थे, लेकिन होंठों पर हल्की मुस्कान। “नीरज… मुझे भी।”दोनों ने उस दिन वादा किया कि चाहे हालात जैसे भी हों, एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ेंगे। बोर्ड एग्ज़ाम खत्म होने के कुछ हफ्तों बाद, बबली को दिल्ली जाना पड़ा। जाते समय उसने कहा, “अगर किस्मत में साथ होना लिखा है… तो हम फिर मिलेंगे।” नीरज कॉलेज में दाखिला ले चुका था, लेकिन हर रात वो बबली की पुरानी नोटबुक पढ़ता— “नीरज, तुम मुझे हंसाना कभी मत छोड़ना…” “तुम्हारी बातें मेरी सबसे प्यारी याद हैं।” दोनों के बीच कभी-कभी चैट होती, लेकिन पढ़ाई और दूरी ने सब बदल दिया था।
फिर एक शाम, नीरज के फोन पर मैसेज आया— “कल मैं तुम्हारे शहर आ रही हूं… मिलोगे?” नीरज का दिल तेजी से धड़कने लगा। अगले दिन, दोनों अपने पुराने स्कूल के पास वाली गली में मिले। बबली पहले जैसी ही थी, बस आंखों में और गहराई आ गई थी। “जानते हो नीरज, दिल्ली की भीड़ में रहकर भी… तुम्हारे साथ बिताए दिन सबसे ज्यादा याद आते हैं।” नीरज ने उसकी आंखों में देखते हुए कहा, “तो क्या अब हमें फिर से शुरू करना चाहिए?” बबली ने मुस्कुराकर कहा, “हाँ… लेकिन इस बार, किसी एग्ज़ाम का इंतज़ार नहीं करेंगे। उस पल नीरज ने उसका हाथ थाम लिया। दोनों जानते थे—अब चाहे दूरी आए, समय बदले, या जिंदगी की राहें मुश्किल हों, उनका रिश्ता अब अधूरा नहीं रहेगा। क्लास 12th के मासूम दिनों में शुरू हुई वो कहानी… अब जिंदगी भर के लिए पूरी हो चुकी थी ।